अन्धकार
पूर्वजो की इक्छा , आशा, महत्वकांक्षा ,क्रोध , बैर , प्रतिशोध यही सब आने वाली पीड़ी कि धरोहर बनते है । माता पिता तोह अपने संतानो को देना तोह चाहते है समस्त विश्व का सुख पर देते है अपनी पीडाओ की संपत्ति , देना चाहते है अमृत पर साथ ही साथ विष का घड़ा भी भर देते है , आप विचार कीजिये आपने अपने संतानो को क्या दिया अवश्य प्रेम , प्यार , संपत्ति आदि दी है पर क्या साथ ही साथ उसके मन को मेल से भर देने वाले पूर्ववृहों नहीं दिए, अच्छे बुरे की पूर्वनिर्धारित व्याख्या नहीं दी । व्यक्ति का व्यक्ति के साथ , समाज का समाजो के साथ , राष्ट्र का राष्ट्रो के साथ संघर्ष क्या इन्ही पूर्ववृहों से निर्मित नहीं होते , हत्या मृतु जन्मपात क्या इन्ही पूर्ववृहों से नहीं जन्मे अर्थात माता पिता अपने संतानो को जन्म के साथ मृत्यु का दान भी देते है , प्रेम के प्रकाश के साथ साथ घृणा का अन्धकार भी देते है और अन्धकार मन का हो , हृदय का हो या वास्तविक हो उसे केवल भय प्राप्त होता है केवाल भय ।
स्वयं विचार किजिये…।
स्वयं विचार किजिये…।


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