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रविवार, 22 दिसंबर 2013

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निर्बलता

जगत में प्रत्येक व्यक्ति को किसी न किसी प्रकार की निर्बलता अवश्य रहती है , जैसे कोई बहुत तेज़ी से दौड़ नहीं पाता तो कोई अधिक भार नहीं उठा पता , कोई आसान से रोग से पीड़ित रहता है तो कोई पढे हुए पाठो को स्मरण में नहीं रख पता , ऐसे अनेको उद्धरण और भी है क्या आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानते है जिसे सबकुछ प्राप्त हो और हम उस जीवन की एक निर्बलता को जीवन का केंद्र मान कर चलते है इस कारणवश हृदय में क्रोध और दुःख रहता है सदा निर्बलता मनुष्य को जन्म से अथवा संजोग से प्राप्त होती है परन्तु उस निर्बलता को मनुष्य का मन अपनी मर्यादा बना लेता है किन्तु कुछ व्यक्ति ऐसे भी होते है जो अपने श्रम से उस निर्बलता को पराजित कर देते है  क्या भेद है उनमे और अन्य लोगो में क्या आपने कभी विचार किया है ? सरल सा उत्तर है इसका जो व्यक्ति निर्बलता से पराजय नहीं होता जो पुरुषाद करने का साहस रखता है हृदय में  वो निर्बलता को पार कर जाता है अर्थात निर्बलता अवश्य ईश्वर देता है परन्तु मर्यादा , मर्यादा मनुष्य का मन ही निर्मित करता है। …

स्वयं विचार कीजिये। ……… 

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